Ajab Gajab

जानिये आखिर क्यों लगायी अंग्रेज़ों ने भारतीय महिला जासूस की मूर्ति

जानिये आखिर क्यों लगायी अंग्रेज़ों ने भारतीय महिला जासूस की मूर्ति

अक्सर आपने देखा होगा कि किसी शहर के सड़क के चौराहों, नुक्कड़ पर या किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी विशेष व्यक्ति द्वारा अपने देश के सामाजिक, साहित्य, खेल जैसे क्षेत्र में अच्छे काम और सराहनीय सहयोग के लिए उनके मरणोपरांत उनकी याद में उनसे सम्बंधित स्थानों पर स्मारक स्थापित किये जाते है. लेकिन क्या आप जानते है ? भारत की एक ऐसी महिला के बारे में जिसका स्मारक लंदन में स्थापित किया गया है, और किस वजह से किया गया है……? नहीं……! तो चलिए हम आपको बताते है एक ऐसी महिला के बारे में जिसने भारत हित के लिए फ़्रांस में महीनों जासूसी कि और पकड़े जाने पर कोई भेद नहीं खोला. उनकी इसी सराहनी और साहसी काम से प्रेरित होकर लंदन में उनकी प्रतिमा को स्थापित किया गया .

दरअसल भारतीय मूल की ब्रितानी महिला जासूस ‘नूर इनायत ख़ान’ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ़्रांस में अपनी सेवाएं दी थीं. जर्मन खुफिया एजेंसियों ने उन्हें पकड़ने के बाद पहले तो बहुत यातनाएं दीं और बाद में उन्हें गोली से भून दिया गया.

जाने कौन थी नूर?

नूर मैसूर के महाराजा टीपू सुल्तान की वंशज थीं. वही मशहूर टीपू सुल्तान जिन्होंने ब्रिटिश शासन के सामने झुकने से इंकार कर दिया था. टीपू सुल्तान 1799 में अंग्रेजों के साथ लड़ाई में मारे गए थे.

फ़र्राटे से फ़्रेंच बोलने वाली नूर इनायत ख़ान को 1943 में ब्रिटेन के तोड़-फोड़ करने वाले बल में ‘स्पेशल ऑप्रेशन एग्ज़क्यूटिव’ के तौर पर शामिल किया गया था. वह पहली महिला रेडियो ऑपरेटर थीं जिन्हें 1943 में इस मशहूर निर्देश के साथ भेजा गया था कि ‘यूरोप को लपटों के हवाले कर दो.’

उनकी भूमिका इतनी ख़तरनाक थी कि कई लोग मानते थे कि फ्रांस में वह छह सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह पाएंगी.

नेहरू और गाँधी की मुरीद थी नूर

इसके बावजूद उन्होंने अपनी इच्छा से युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर जाने की हामी भरी. नूर एक राष्ट्रवादी थीं और नेहरू और गाँधी की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं.

पेरिस में गेस्टापो के ब्रिटिश खुफिया तंत्र को तहस नहस करने के बाद वह आखिरी व्यक्ति थीं जिनका लंदन से संपर्क बना हुआ था. जब गिरफ़्तारियाँ होने लगीं तो उनके कमांडरों ने उनसे कहा कि वह वापस लौट आएं लेकिन वह अपने फ़्रेंच साथियों को बिना बताए छोड़ कर वापस आने के लिए तैयार नहीं हुईं.

तीन महीनों तक वह फ्रांस में अपने बूते पर जासूसी करती रहीं. इस बीच उन्होंने कई ठिकाने और वेश बदले. पर अंतत: उनको गिरफ़्तार कर लिया गया.

नूर इनायत ख़ान को मेडलीन का कूट नाम दिया गया था और 13 सितंबर 1944 को उन्हें डचाऊ के यातना शिविर में गोली मारी गई थी.

नूर इनायत ख़ान को उनके फ़्रांस में किए गए काम के लिए मरणोपरांत जॉर्ज क्रॉस दिया गया था. उनको यह सम्मान दस महीनों तक गेस्टापो द्वारा यातनाएं दिए जाने के बावजूद कुछ न बताने के लिए दिया गया था.
उनके इस सराहनीय साहसी काम से प्रेरित होकर उनकी मूर्ति गॉर्डन स्कवायर गार्डेंस में लगाई गई है. ये स्थान उनके ब्लूम्सबरी स्थित घर के पास है जहाँ वह 1914 में एक बालिका के तौर पर रहा करती थीं.

लंदन में भारतीय मूल की इस महिला जासूस नूर इनायत ख़ान की मूर्ति का अनावरण राजकुमारी ऐन ने किया और इस मौके पर नूर के परिवार के सदस्य और ब्रिटेन के पुराने जासूस भी मौजूद रहे.
सराहनी और साहसी काम से मिला सम्मान !

Click to add a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ajab Gajab

More in Ajab Gajab

जानिए क्यों चाँद पर कदम रखने वाले पहले आदमी ने मांगी थी इंदिरा से माफ़ी

AshishApril 4, 2018

सनकी राष्ट्रपति जो मदिरा पान व् धूम्रपान न करने वालों को देना चाहता है मौत

AshishApril 4, 2018

भारतीय इतिहास का रईस महाराजा जिससे अंग्रेज़ भी मांगते थे क़र्ज़

AshishApril 4, 2018

क्यों भारतीय सेना सिर्फ जिप्सी इस्तेमाल करती है ?

AshishApril 4, 2018

Sedlec Ossuary एक रहस्यमयी चर्च जिसमे सजीं हैं ४० हजार लोगों की हड्ड‍ियां

AshishApril 4, 2018

जीवट चीनी जनजाति जिन्होंने बना डाला समुद्र पर तैरता गाँव

AshishApril 4, 2018

पढ़िए भारतीय सविंधान पे क्यों हर भारतीय को गर्व करना चाहिए

AshishApril 4, 2018

शोध में मिले प्रमाण ख़त्म हो जायेगा धर्म 21 वीं सदी में

AshishApril 4, 2018

ऑगस्ट लैंडमेसर जिसने भरी सभा में की थी हिटलर की बेइज़्ज़ती

AshishApril 4, 2018

Copyright 2016 Comicbookl / All rights reserved