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क्या है फ्री मेसनरी? क्या ये शैतान को पूजतें हैं ?

क्या है फ्री मेसनरी? क्या ये शैतान को पूजतें हैं ?

क्या दुनिया को फ्रीमेसंस चला रहे हैं? ये माना जाता है कि दुनिया की सबसे प्रभवशाली सरकारें,व्यापार समूह,कला और मीडिया को चलाने वाले मेसन ही हैं. आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली देश अमेरिका के 44 राष्ट्रपतियों में से 15 मेसन सीक्रेट सोसाइटी से ही आते हैं जिनमें जॉर्ज वाशिंगटन और रूज़वेल्ट जैसे नाम शामिल हैं. आइये इस सीक्रेट सोसाइटी के बारे में कुछ अन्य बातें भी जान लेते हैं.

इतिहास

Freemason के शाब्दिक अर्थ को समझें तो ‘free+Mason’ मतलब ‘स्वतंत्र+पत्थरों का काम करने वाला कारीगर’. मेसन का उद्गम इंग्लैंड माना गया है, जहाँ 15-वीं शताब्दी में भवन निर्माण उत्कर्ष पर था और देश की अर्थव्यवस्था में अहम् भूमिका निभा रहा था. उस समय मेसन या स्टोनमैन अलग अलग प्रोजेक्ट पर जा कर कंस्ट्रक्शन का काम करते थे तथा एक परिवार की तरह रहते थे. उसी दौरान मेसन गिल्ड का गठन हुआ, जिसमे प्रवेश सिर्फ प्रवीण कारीगरों को दिया जाता था. प्रवेश लेने पर मेसन को गोपनीयता की शपथ लेनी होती थी जिसके बाद उसे पत्थर के बारीक काम के सीक्रेट सिखाये जाते थे. वहीं से इस सीक्रेट ऑर्गनाइज़ेशन के गठन की नींव पड़ी,कालांतर में इन्होने अपने को स्वतन्त्र कारीगर या freemason का नाम दिया. किसी कारणवश यदि मेसन संगठन छोड़ कर जाता था या निकाला जाता था तो भी ताउम्र उसे सीक्रेट बहार नहीं बताने की प्रतिज्ञा लेनी होती थी. इंग्लैंड और यूरोप में गॉथिक स्टाइल में बने कई प्रसिद्ध भवनों का निर्माण फ्रीमेसन द्वारा किया गया.

आधुनिक फ्रीमेसन सोसाइटी

गॉथिक स्टाइल के भवन जब यूरोप में ट्रेंड में नहीं रहे तो भी मेसन सोसाइटी समाप्त नहीं हुई और आज तक हमारे समय में जीवित है. इस समय अमेरिका में लगभग 20 लाख और इंग्लैंड में लगभग 5 लाख मेसन हैं.आधुनिक मेसन अत्यंत प्रभावशाली लोग हैं.फ्रीमेसन कोई धर्म नहीं है इसलिए किसी भी प्रजाति यूरोपियन,एशियाई, अफ्रीका मूल का पुरुष (फेमिनिस्टों से क्षमा के साथ) जिसकी उम्र 21 वर्ष से ऊपर हो मेसन बनने के लिए एलिजिबिल होता है. ये ऐसे लोगों का समूह है जो आत्मसुधार और ज्ञानवर्धन में विश्वास रखते हैं. सरकारों,व्यापारों,कला और मीडिया पर प्रभुत्व बना कर अपने सुधार के कार्यों को चलाना और बढ़ाना इनका ध्येय होता है.मेसन इतने प्रभावशाली हैं कि अमेरिका में एक बड़े वर्ग की मान्यता है कि 1 डॉलर के नोट पर जो अमेरिकन ग्रैंड सील है वो मेसन का सिम्ब्ल ही है.यदि ग्रैंड सील पर डेविड स्टार बनाया जाये तो मेसन पिरामिड और M A S O N अक्षर दिखाई देते हैं.

निम्नलिखित कुछ मुट्ठीभर उदाहरण हैं समझने के लिए कि हर क्षेत्र में कितने प्रभावशाली लोग इस सोसाइटी से ताल्लुक रखने वाले थे.

लेखक-वॉल्टर स्कॉट,वोल्फगांग गेटे,ऑस्कर वाइल्ड,मार्क ट्वैन

कंपोजर-निकोलो पगानिनी,मोजार्ट,जोसेफ हयडेन,लुडविक वान बेथोवेन,फ्रांज़ लिस्ज़्ट

कवि-रुडयार्ड किपलिंग,रोबर्ट बर्न्स

राजनीतिज्ञ-रूज़वेल्ट,जॉर्ज वाशिंगटन,विंस्टन चर्चिल. (एक वर्ग का मानना है कि इस समय के राजनीतिज्ञों में जेम्स कैमरून,व्लादिमीर पुतिन और बराक ओबामा का सम्बन्ध भी सोसाइटी से है.)

व्यापारी-हेनरी फोर्ड, रोस्चाइल्ड (Rothschild)

इसके अतिरिक्त कई सुप्रीम कोर्ट के जज और अमेरिकन कोंग्रेसमैन और सिनेटर्स भी इसी संगठन से सम्बंधित हैं.

अनुक्रम (hierarchy)

सोसाइटी में किसी औपचारिक अनुक्रम का प्रावधान नहीं है. सर्वप्रथम संवैधानिक लॉज (lodge) का निर्माण किया जाता है जो ग्रैंड लॉज के अधीन होती है. हर लॉज में तीन डिग्री होती हैं,जिसमे तृतीय डिग्री सबसे उच्च है वो मिलने के बाद व्यक्ति को मास्टर मसोन का दर्ज़ा मिल जाता है.

फर्स्ट डिग्री रिचुअल– व्यक्ति की दीक्षा के लिए आँख पर पट्टी बांध कर सीधे पैर के घुटने को निर्वस्त्र किया जाता है.

सेकंड डिग्री रिचुअल– इसमें प्रशिक्षु को सीक्रेट सोसाइटी के अंदर प्रवेश मिलता है.

थर्ड डिग्री रिचुअल– इसमें मास्टर की उपाधि दी जाती है जो उच्चतम उपाधि है.

मेसन के बारे में के मिथ प्रचिलित किये गए,जैसे कि मेसन डेविल पूजा करते हैं व्यक्ति का रक्त पीते हैं इत्यादि परन्तु ऐसा मानना है कि ये सभी कुप्रचार हैं. ये प्रभावशाली व्यक्तियों का समूह अपने अपने तरीके से समाज सुधार और कल्याण में लगे हैं. हर मेसन वार्षिक शुल्क जमा करवाता है.

भारत में मेसन 

यद्यपि भारत में फ्रीमेसनरी पुराने समय से है परन्तु कम लोग इसके बारे में जानते हैं. अंग्रेज़ों की कॉलोनी होने के कारण फ्रीमेसोनरी भारत में बहुत पहले से है. माना जाता है कि भारत के ऐसे प्रभावशाली लोग जैसे स्वामी विवेकानंद,मोतीलाल नेहरू,जमशेद जी टाटा अदि मेसन समुदाई थे. भारत के कई शहरों में मेसन एम्ब्लेम (स्क्वायर और कम्पस) के साथ बिल्डिंग्स बनी हुई हैं. यहाँ तक कि राष्ट्रपति भवन जो पूर्व में वाइसराय हाउस था वहाँ भी मेसन चिन्ह मिलते हैं. भारतीय ग्रैंड लॉज द्वारा जंतर मंतर में भी मेसन चिन्ह पाए जाने का दवा किया जाता है.

आज के न्यू इंडिया में कौन-कौन से प्रभावशाली राजनीतिज्ञ मेसन हैं ये पाठकों की कल्पना की उड़ान पर सौंप कर इस लेख का अंत करता हूँ. धन्यवाद!

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