80's & 90's

90s के धारावाहिक जो आज भी दिलाते हैं बचपन की याद

90s के धारावाहिक जो आज भी दिलाते हैं बचपन की याद

90’s के दौर के ऐसे कई पॉपुलर सीरियल रहे हैं, जिन्हें याद कर लोग अपने बचपन में चले जाते हैं। इनमें रामानंद सागर प्रोडक्शन के सीरियल रामायण, अलिफ लैला और विक्रम-बेताल के अलावा बीआर चोपड़ा प्रोडक्शन का टीवी शो ‘महाभारत’ काफी फेमस हुए। कहा जाता है कि जब ये शो शुरू होते थे तो सड़कों पर भीड़ अपने आप ही कम हो जाती थी।

वैसे इनके अलावा भी 90’s के ऐसे कई टीवी शोज हैं, जो काफी पॉपुलर रहे और आज भी लोगों को याद हैं। इनमें ‘देख भाई देख’, चंद्रकांता, सुरभि, चित्रहार, रंगोली, ब्योमकेश बख्शी और श्रीमानजी श्रीमतीजी जैसे कई शोज हैं। इनकी कहानी को आजकल के सास-बहू वाले डेली सोप की तरह जबर्दस्ती नहीं खींचा जाता था। यही वजह है कि इनकी पॉपुलैरिटी आज भी बरकरार है। इस पैकेज में हम बता रहे हैं उस दौर के कुछ ऐसे ही पॉपुलर TV शोज के बारे में।

चंद्रकांता (1994-96)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : शिखा स्वरूप, शाहबाज खान, मुकेश खन्ना, जावेद खान, इरफान खान, पंकज धीर, अखिलेन्द्र मिश्रा।

देवकी नंदन खत्री के उपन्यास पर बना सीरियल चंद्रकांता 1994 में पहली बार दूरदर्शन पर आने के साथ ही घरों में छा गया था। बड़ों को इसकी कहानी पसंद आई तो बच्चे क्रूर सिंह के किरदार और उसके फेमस डायलॉग ‘यक्कू’ को पसंद करते थे। इसमें नौगढ़ और विजयगढ़ की कहानी दिखाई गई थी। नौगढ़ का राजकुमार कुंवर वीरेंद्र विक्रम, विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता से प्यार करता था।

विक्रम और बेताल (1993)
चैनल – दूरदर्शन
स्टारकास्ट – अरुण गोविल, सज्जन, अरविंद त्रिवेदी, दीपिका चिखलिया, विजय अरोड़ा।

90 के दशक में ‘विक्रम और बेताल’ सीरियल काफी पॉपुलर हुआ था। इसमें राजा विक्रमादित्य की कहानी थी। घनघोर अंधेरी रात में राजा विक्रम अपनी खुली तलवार लिए बेताल को पकड़ने आगे बढ़ते हैं और उसे वश में कर अपनी पीठ पर लाद कर ले जाने लगते हैं। सफर लंबा होने के कारण बेताल राजा विक्रम को कहानी सुनाता है और हमेशा की तरह शर्त रखता है कि अगर कहानी सुनने के बाद तुमने उत्तर देने के लिए मुंह खोला तो मैं उड़ जाऊंगा। अगर उत्तर नहीं दिया तो तुम्हारे सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे।

देख भाई देख (1993-94)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : सुषमा सेठ, नवीन निश्चल, शेखर सुमन, फरीदा जलाल, भावना बलसावर

इस सीरियल की कहानी एक ऐसी फैमिली की थी, जहां सभी मिल-जुलकर रहते हैं। फैमिली का हर मेंबर बड़ा हो या बच्चा या फिर नौकर सभी में एक खास जुड़ाव होता है। फैमिली के मुखिया दुर्गादास दीवान (दादा) थे, लेकिन असली मुखिया सरला दीवान (दादी) थीं। सरला दीवान का रोल सुषमा सेठ ने प्ले किया था।

महाभारत (1988-90)

चैनल:दूरदर्शन
स्टारकास्ट : मुकेश खन्ना, पुनीत इस्सर, गिरिजा शंकर, गजेन्द्र चौहान, प्रवीण कुमार, रेणुका इसरानी, नाजनीन, रूपा गांगुली, नीतिश भारद्वाज और पंकज धीर।

महाभारत में द्वापर युग में पांडवों और कौरवों के बीच हुए युद्ध को दिखाया गया।

 अलिफ लैला (1993-97)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : गिरिजा शंकर, दामिनी कंवल, हैदर काजमी, शाहनवाज खान, प्रमोद कपूर, सुलक्षणा खत्री।

‘रामायण’ के बाद रामानंद सागर प्रोडक्शन का यह दूरदर्शन पर दूसरा सीरियल था, जो काफी पॉपुलर हुआ। यह अपने अरबी नाम अल्फ लैला से ही ‘अलिफ लैला’ बन गया। अरबी में अल्फ का अर्थ है एक हजार और लैला का अर्थ है रात। यह एक हजार कहानियों का संग्रह है, जिससें चमत्कार और जादू-टोना की भरमार है। इसे ‘अरबियों का पंचतंत्र’ भी कहा जाता है।

ब्योमकेश बख्शी (1993-97)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : रजित कपूर, सुकन्या कुलकर्णी, केके रैना, कार्तिक दत्ता, आदित्य श्रीवास्तव।

शरदेन्दु बंदोपाध्याय के जासूसी नॉवेल पर बेस्ड सीरियल ‘ब्योमकेश बख्शी’ को डायरेक्टर बासु चटर्जी ने बनाया। सीरियल में ब्योमकेश बख्शी का रोल करने वाले रजित कपूर के मुताबिक, सीरिज में एक एपिसोड था ‘साइकिल की घंटी’, वो मुझे बेहद दिलचस्प लगा था। वही मेरी फेवरेट कहानी थी।

श्रीमानजी-श्रीमतीजी (1994)
चैनल – दूरदर्शन
स्टारकास्ट : जतिन कनकिया, रीमा लागू, अर्चना पूरन सिंह, राकेश बेदी, अजय नागरथ, शैल चतुर्वेदी।

पॉपुलर कॉमेडी शो ‘श्रीमानजी श्रीमती जी’ 90 के दशक में काफी पॉपुलर हुआ था। फिलहाल एंड टीवी पर चल रहा शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ इसी से इंस्पायर होकर बनाया गया है। ‘श्रीमानजी श्रीमती जी’ में दो पड़ोसी कपल्स की कहानी थी, जिसमें पति अपनी-अपनी पड़ोसनों पर फिदा थे। इस शो में अर्चना पूरन सिंह, रीमा लागू, राकेश बेदी और जतिन कनकिया थे। रीमा लागू और जतिन कनिकया के बेटे का रोल अजय नागरथ ने प्ले किया था।

फ्लॉप शो (1991)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : जसपाल भट्टी, विवेक शौक, सविता भट्टी, राजेश जॉली और बीएन शर्मा।

90 के दशक की शुरुआत में जसपाल भट्टी दूरदर्शन के लिए टीवी सीरियल ‘फ्लॉप शो’ लेकर आए जो काफी पॉपुलर हुआ। इसके बाद जसपाल भट्टी को कार्टूनिस्ट की बजाय एक कॉमेडी एक्टर के रूप में जाना जाने लगा। जसपाल का ‘फ्लॉप शो’ और ‘उल्टा-पुल्टा’ जैसे शो काफी पॉपुलर हुए। जसपाल इस सीरियल्स के माध्यम से प्रशासन और सरकार पर भी तंज कसते थे। इसके सभी एपिसोड में कलाकार एक ही होते थे पर उनका कैरेक्टर बदल जाता था।

हम पांच (1995-99)
चैनल : जीटीवी
स्टारकास्ट : अशोक सराफ, प्रिया तेंडुलकर, शोमा आनंद, विद्या बालन, वंदना पाठक, अमिता नंगिया, राखी टंडन।

1995 में शुरू हुए कॉमेडी सीरियल ‘हम पांच’ में माथुर परिवार की सबसे बड़ी बेटी मीनाक्षी माथुर का रोल वंदना पाठक ने निभाया था। वो शो में महिलाओं को हक और महिला सशक्तिकरण के लिए अपने बेलन के साथ तैयार रहती थीं। वहीं, एक्ट्रेस विद्या बालन ने माथुर परिवार की दूसरी बेटी राधिका का रोल किया था। राधिका इंटेलिजेंट थी और हियरिंग मशीन का इस्तेमाल करती थी। राधिका को चीजों से टकराने की आदत थी। वो दरवाजे, दीवार, मूर्तियों से टकराती रहती थी।

सुरभि (1993-2001)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : रेणुका शहाणे और सिद्धार्थ काक।

यह उस दौर का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कल्चरल प्रोग्राम था, जो भारतीय संस्कृति को अनूठे ढंग से दिखाता था। इसे रेणुका शहाणे और सिद्धार्थ काक होस्ट करते थे। इसकी शुरुआत स्वतंत्र रूप से हुई थी। हालांकि बाद में अमूल इसे स्पांसर करने लगा। इसकी पॉपुलैरिटी की मुख्य वजह इसमें आने वाली वीकली क्विज थी, जिसमें सभी दर्शक पार्टिसिपेट कर जवाब भेज सकते थे। उस दौर में एक हफ्ते के अंदर इस सीरियल को करीब 1.5 लाख पोस्टकार्ड आते थे। यही वजह थी की डाक विभाग ने इसके बाद ‘कॉम्पिटीशन पोस्टकार्ड’ शुरू कर दिए थे, जिसकी कीमत 2 रुपए थी।

तहकीकात (1994-95)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : विजय आनंद, सौरभ शुक्ला।

90’s के पॉपुलर डिटेक्टिव थ्रिलर सीरयल्स में से एक तहकीकात को लोग काफी पसंद करते थे। शो में विजय आनंद ने सैम डिसिल्वा और सौरभ शुक्ला ने गोपी का रोल निभाया था। इसमें अलग-अलग क्राइम केसेज को ह्यूमर टच के साथ सॉल्व करते देखना लोगों को काफी अच्छा लगता था।

शांति (1994)
चैनल : दूरदर्शन
स्टारकास्ट : मंदिरा बेदी, मोहिनी शर्मा, अमित बहल, अनूप सोनी, अमर तलवार, इरावती हर्शे।

भारतीय टेलीविजन इतिहास का पहला डेली सोप था ‘शांति : एक औरत की कहानी’। यह दूरदर्शन पर दोपहर में आता था। सीरियल की कहानी एक महिला पत्रकार शांति के इर्द-गिर्द घूमती है। शांति बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउस के दो मालिक कामेश महादेवन और राजा जीजे सिंह की बायोग्राफी लिखने के लिए इनके घर ‘शांति मेंशन’ जाती है। इस मेंशन में कई रहस्य छिपे हैं, जिन्हें सीरियल में दिखाया गया है।

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